Monday, August 8, 2016

फ़र्ज़

तुझसे रूठना मेरा हक़ है,
मुझे मनाना तेरा फ़र्ज़,....
 फर्क़ इतना सा है की
 मैं अपना हक़ फ़र्ज़ समझके निभाती हूँ
और तू फ़र्ज़ को फ़र्ज़ समझके नहीं निभाता... निवेदिता

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