Monday, August 8, 2016

फ़र्ज़

तुझसे रूठना मेरा हक़ है,
मुझे मनाना तेरा फ़र्ज़,....
 फर्क़ इतना सा है की
 मैं अपना हक़ फ़र्ज़ समझके निभाती हूँ
और तू फ़र्ज़ को फ़र्ज़ समझके नहीं निभाता... निवेदिता

टूट्ता तारा



आस्मां के दिल में बसता हुआ
तारा जब टूट जाता है तो
वो हटाएगा को नहीं पता
पर हताश दूसरे तारों के
सीने में छुप जाता है..



आस्मां से गिरता वो ,
तारा जब टूट जाता है तो ,
टूटे हुए दिलों को ,
फिरसे मिलन की आस देता  है ..


ख़्वाहिशें जाग जाती हैं ,
टूटे हुए तारे से ,खोया प्यार माँगते हैं
नई मन्नतें , नए ख़्वाबों को ,
संजोने का वह ख़्वाब देता है ..

टूटा हुआ वहि तारा ,
आज जो टूटकर भी ना टूटा है ..
जो कल तक ,
आस्माँ के दिल में बसता था .. 

जुगनू

I dont have the "fireflies" of words to tell u how much light of love flashes in my heart for u ..

mujhe alfazon ke " jugnu" nahin milte ...

मुझे अल्फ़ाज़ों के जुगनू नहीं मिलते
गर मिलते तो ,तेरे ज़िंदगी में
अंधेरों के कोनों में उन्हें भर देती . .


मुझे अल्फ़ाज़ों के जुगनू नहीं मिलते ,
गर मिलते तो ,उन्ही से तेरी ज़िंदगी को
मेरे शब्दों से रोशन कर देती ...



मुझे अल्फ़ाज़ों के जुगनू नहीं मिलते
गर मिलते तो ,तेरी ज़िंदगी की रातों में
जुगनुओं से ज्योत्सना भर देती .. निवेदिता

आशाएँ

जीवन में कुछ पाने की
अभिलाषाए जब जग जायें
तभी तो जीवन को जीने की
आशाएं नज़र आयें

निराशा के चंगुल से छूट
भाग्य दुल्हन बन बैठी हें
सारी खुशियाँ दामन में
किस्मत दीपों सी जगमगायें

कब जीवन अंत हो जाये
इसका हमें है ज्ञान नहीं
बस लोगों के कहने की
परवाह हम कर बैठें हैं

सुन्दरता का घमंड है
ना जाने कब मिट जाएंगें
मिटटी से बने हुए है
मिटटी में मिल जाएंगें   ... "निवेदिता"










तेरी आदत में नहीं

तू मेरी ख़ुशी मेरी चाहत है लेकिन ,
खुद्द पर किसी को थोपना मेरी आदत में नहीं ।

मेरी ख्वाहिशों को पंख तूने दिए ,
पर उन्हें सहेजना तेरी आदत में नहीं।

तू अयने की उस अक्स की तरह है ,
जो ज़रा हिलते ही साथ छोड़ देती है ,
वफ़ा बन साथ देना शायद तेरी आदत में नहीँ ।।

हर वक़्त बस तेरा ही ख्याल तुझे रहता है
मेरी आरज़ूओं का ख्याल रखना शायद तेरी आदत में नहीं ।।

ख्वाबों में भी तेरी आरज़ू ख़त्म होती नहीं
मेरा चेहरा भी याद रखना तेरी आदत में नहीं ।।
 ....."निवेदिता"