तुझसे रूठना मेरा हक़ है,
मुझे मनाना तेरा फ़र्ज़,....
फर्क़ इतना सा है की
मैं अपना हक़ फ़र्ज़ समझके निभाती हूँ
और तू फ़र्ज़ को फ़र्ज़ समझके नहीं निभाता... निवेदिता
मुझे मनाना तेरा फ़र्ज़,....
फर्क़ इतना सा है की
मैं अपना हक़ फ़र्ज़ समझके निभाती हूँ
और तू फ़र्ज़ को फ़र्ज़ समझके नहीं निभाता... निवेदिता